जमीनी विवाद में पत्रकार प्रदीप दुबे पर हुआ जानलेवा हमला,पांच पर मुकदमा दर्ज
पत्रकार की कलम को खामोश करने की हो रही साजिश
सुधीर राय
Date:02/03/2026
ग़ाज़ीपुर जिले से है जहां पर एक बार फिर पत्रकार की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शादियाबाद थाना क्षेत्र में जमीन विवाद के चलते स्थानीय पत्रकार प्रदीप दुबे पर कथित तौर पर जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामनेआया है। घटना के बाद पत्रकारों में भारी आक्रोश व्याप्त है और पुलिस प्रशासन से त्वरित व निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की जा रही है।

घटना शादियाबाद थाना अंतर्गत यूसुफपुर(खंडवा) गांव की बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, महुआ चैनल बंसल न्यूज से जुड़े पत्रकार प्रदीप दुबे पुत्र रामजी दुबे ने थाने में दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि उनकी भूमि, जो मौजा नसीरपुर थाना जंगीपुर में आराजी नंबर 286 में 6 धुर पर रजिस्ट्री कराई गई है, उस पर कुछ लोग जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।
“रास्ते में रोककर की गई मारपीट”
तहरीर के अनुसार, दिनांक 02 मार्च 2026 को सुबह करीब 8:30 बजे जब प्रदीप दुबे अपने घर से गाजीपुर जाने के लिए निकले, तभी आरोपितों ने उनके दरवाजे के सामने गाड़ी रोक ली। आरोप है कि जैन विक्रम सिंह पुत्र विनोद सिंह, निलेश सिंह पुत्र रतन सिंह, भोला ठाकुर पुत्र रतन सिंह, करमवीर उर्फ सोनू सिंह पुत्र नेहरू सिंह और लकी राजभर पुत्र अजात (निवासी बभनौली, थाना शादियाबाद) ने गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडों से मारपीट की। पत्रकार ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उनके मकान के शटर का ताला तोड़ने की धमकी भी दी और जान से मारने की चेतावनी दी। मारपीट में उनके दाहिने हाथ की बांह में चोट आई है, पहले भी रोकने का किया गया।
प्रदीप दुबे ने अपनी तहरीर में यह भी उल्लेख किया है कि 26 फरवरी 2026 की रात करीब 11 बजे जब वह अपने ससुराल से लौट रहे थे, तब गांव के बाहर बिना नंबर प्लेट की बुलेट मोटरसाइकिल से उनकी गाड़ी रोकने का प्रयास किया गया। हालांकि उस समय वह किसी तरह बचकर निकलने में सफल रहे।
“पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा”
तहरीर मिलते ही शादियाबाद थाना प्रभारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच उपरांत पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 192(2), 115(2), 352 और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
*पत्रकारों में रोष, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग*
घटना के बाद जिले के पत्रकार संगठनों में आक्रोश का माहौल है। पत्रकारों का कहना है कि यदि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर इस तरह हमले होते रहेंगे तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार होगा। उन्होंने पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा से मामले में त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और समाज में कानून के प्रति विश्वास बना रहे। स्थानीय पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपियों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।
अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और आरोपितों के विरुद्ध क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। यह घटना न केवल एक पत्रकार पर हमला है, बल्कि कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों की भी परीक्षा है। जिले की जनता और पत्रकार समुदाय की नजरें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।