रसोई की आग ठंडी, नंदगंज की गृहिणियां गैस संकट से बेहाल
ना होम डिलीवरी ना सिलिंडर,किल्लत और ब्लैक में बिक्री से महिलाओं का टूटा सब्र, घर चलाना हुआ मुश्किल
सुधीर राय/गाजीपुर ।
Date:२८/०४/२०२६

गृहिणियों का कहना है कि सुबह-शाम खाना बनाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। गैस खत्म होने के बाद नया सिलेंडर समय पर नहीं मिल पा रहा, जिससे उन्हें लकड़ी, कोयला या चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न केवल समय अधिक लग रहा है, बल्कि धुएं से स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। कई महिलाओं ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चों के साथ धुएं में खाना बनाना बेहद कठिन हो गया है।
महिलाओं का यह भी आरोप है कि गैस एजेंसियों पर जाने के बाद भी उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। हर बार यही कहा जाता है कि “सिलेंडर उपलब्ध नहीं है”, जबकि दूसरी ओर होटल संचालकों और कुछ प्रभावशाली लोगों को आसानी से गैस मिल जा रही है। इससे महिलाओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और उन्हें अपने साथ भेदभाव महसूस हो रहा है। उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया की एजेंसी के कर्मचारियों का सिलेंडर वितरण का कोई कायदा कानून नही है,कभी कहते हैं की सुबह ५ बजे ही बांट दिया गया तो कभी ६ बजे,होम डिलीवरी को लेकर तत्कालीन D.M. के दिए गए दिशा निर्देशों की तो खुलेआम खिल्ली उड़ाई जाती है,मानो इनके आगे प्रशासन भी नतमस्तक है। मानो इनके आगे जिले का ” आइएएस अफसर इनके लिए बौना साबित हो रहा व उपभोक्ताओं के साथ करार महज A BCD ” जिसे ये जब चाहे मिटा दें।
सरकार की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुचारू है, ताकि महिलाओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। नंदगंज और आसपास के क्षेत्रों में महिलाएं रोज इस समस्या से जूझ रही हैं।
कई गृहिणियों ने बताया कि गैस की अनुपलब्धता के कारण घर का पूरा दैनिक क्रम बिगड़ गया है। बच्चों के स्कूल जाने से लेकर परिवार के अन्य सदस्यों के काम पर निकलने तक सब कुछ प्रभावित हो रहा है। ऐसे में मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है।
स्थानीय महिलाओं ने प्रशासन से मांग की है कि गैस सिलेंडर की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए और सभी उपभोक्ताओं को समान रूप से गैस उपलब्ध कराई जाए। साथ ही गैस एजेंसियों की सख्त जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि आम महिलाओं को इस परेशानी से राहत मिल सके।
यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह संकट और गहराता जाएगा और इसका सबसे बड़ा खामियाजा एक बार फिर घर-परिवार संभालने वाली महिलाओं को ही उठाना पड़ेगा।