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करंडा के लालनपुर में अवैध रूप से संचालित विद्यालय कर रहा बच्चों के जीवन से खिलवाड़, ना छत ना पीने का पानी ना शौचालय,आखिर कैसे हो रहा संचालित ?

अधिकारियों के भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है लालनपुर का छत विहीन अवैध विद्यालय,ना कंपाउंड का पता न हैंडपंप

सुधीर राय

Date:10/03/2026

गाजीपुर,उत्तर प्रदेश 

करंडा,गाजीपुर। जनपद के करंडा ब्लॉक अंतर्गत आने वाले ग्राम सभा लालनपुर में अवैध रूप से संचालित एक विद्यालय की हालत बेहद चिंताजनक है। यहां पढ़ने वाले बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिन परिस्थितियों में शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। विद्यालय में न तो पक्की छत की व्यवस्था है और न ही बच्चों को धूप और बरसात से बचाने के लिए कोई सुरक्षित स्थान उपलब्ध है। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
विद्यालय में पीने का स्वच्छ पानी तो दूर हैंडपंप तक की भी कोई व्यवस्था नहीं है, शौचालय तो मानो दूर की कौड़ी हो।

जिस विद्यालय में छोटे छोटे बच्चे व बच्चियां पढ़ते हों और वहां ईंट के ढांचे के सिवाय ना छत हो ना बच्चों के पानी व शौच जैसी मूलभूत सुविधा,इस तरीके के अवैध रूप से विद्यालय संचालन करने व बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ आखिरकार रियायत क्यों?
शिक्षा व्यवस्था की बात करें तो विद्यालय में शिक्षक के नाम पर केवल एक ही शिक्षक तैनात है, जिसे सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। नामांकन तकरीबन 150 बच्चों का। महज एक स्टाफ के कारण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाना न सिर्फ मुश्किल है बल्कि पूर्णतया असंभव।

स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय लंबे समय से इसी प्रकार अव्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है, लेकिन अब तक संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विद्यालय संचालक से जब बात हुई तो बताया की हमारे पास केवल सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकरण है, बी एस ए कार्यालय से मान्यता नहीं है और ना ही यू डाइस कोड,एक बड़ा सवाल खड़ा होता है की बच्चों का वैध नामांकन,उनकी टी सी व अपार आई डी आखिर कैसे बनेगी ?

विद्यालय संचालक से संबंधित अधिकारी के आने के संबंध में पूछा गया तो बताया की आए थे मोहलत देकर गए,जबकि ऐसी परिस्थितियों में संबंधित अधिकारी त्वरित कार्यवाही करते हुए स्कूल को बंद करवा कर बच्चों को अन्यत्र विद्यालय में शिफ्ट कर उनके भविष्य को सुरक्षित करता है।

वहीं जब संबंधित अधिकारी से बात हुई तो बताया की नोटिस दिया गया है। अधिकारी की नोटिस के पीछे एक बड़ा सवाल की ये नोटिस आखिरकार कितनी प्रभावशाली ?

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