गंभीर बीमारी से जूझ रहे दर्जनों गांवों के बच्चों की उम्मीद बने *सिद्धार्थ राय*
नींद में सो रहा जनपद का स्वास्थ विभाग,छीन रहा नौनिहालों का बचपन,मौज कर रहे गांवों में तैनात आशा व एएनएम
गाजीपुर । जनपद की स्वास्थ व्यवस्था को एक समाज सेवी ने कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है।जहां एक तरफ दर्जनों गांवों के नौनिहालों का गंभीर बीमारी से छिनता बचपन वहीं दूसरी तरफ इलाज के कर्ज में डुबता परिवार,आखिर ऐसा क्या है।
गाज़ीपुर शहर के रहने वाले युवा समाज सेवी व सरकार से सम्मानित जिनका नाम सिद्धार्थ राय है।
नाही ये कोई विधायक है और नहीं सांसद अथवा राज्यसभा सदस्य या फिर कोई जिला पंचायत सदस्य या अन्य। किसी भी सदन की सदस्यता न होने की दशा में इन्हे किसी तरीके का कोई यात्रा भत्ता भी नहीं मिलता है,इसके ठीक विपरीत जनपद के जितने चुने हुए प्रतिनिधि हैं उन्हे ये तमाम सुविधाएं मिलती है,परंतु ये प्रतिनिधि इनका सदुपयोग केवल अपने चेले चपाटों अथवा परिचितों के यहां होने वाले पार्टी विशेष के लिए ही करते है। ये किसी गरीब की झोपड़ी में जाना उचित नहीं समझते, क्योंकि वहां उसकी लाचारी,परिवार की बीमारी बच्चों में लकवा, फरका,मस्तिष्क ज्वर,हाथ पैरों का अकड़ जाना,आयुष्मान कार्ड का न होना जैसी अजीबो गरीब समस्याएं होती हैं जो इन्हें खुद को प्रतिनिधि होने पर लानत महसूस कराती है,सच्चाई भी कही न कहीं इसी तरीके की कड़वी है।
इसके ठीक विपरीत युवा समाज सेवी सिद्धार्थ राय गंभीर बीमारी से जूझ रहे तकरीबन एक दर्जन गावों के हर घर में जाते हैं,परिवार का विवरण तैयार करते है और बच्चों के इलाज का हर संभव प्रयास करते है।
आपको बता दे की ये ज्यादातर गांव *सुखबीर एग्रो कंपनी* के आस पास के है,यहां बच्चों में एक अजीबो गरीब बीमारी देखने को मिली है,जहां बच्चे पैदा तो स्वस्थ होते हैं मगर कुछ समय (साल/महीने)बाद उनमें मस्तिष्क ज्वर आना शुरू होता है और धीरे धीरे लकवा मार जाता है, फरके आने शुरू हो जाते है,हांथ पैर अकड़ जाते हैं,हड्डियां कमजोर हो जाती है।
