मनरेगा यानी भ्रष्टाचार और लूट की मद
मनरेगा मजदूरों के जीवन की खुशी को ब्लॉक में बैठे बीडीओ,सचिव व ग्राम प्रधान तीनों ही संगठित अपराध के तहत लूट रहे
गाजीपुर । जनपद में मनरेगा के तहत जिस तरीके से ग्राम सभाओं में बीते कुछ महीनों से प्रधान,सचिव व ब्लॉक में बैठे बीडीओ के करतब देखने को मिले हैं, उसमें मनरेगा के तहत ग्रामीण मनरेगा मजदूरों के हितों से न सिर्फ खिलवाड़ हुआ बल्कि मनरेगा की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
हम सभी जानते है की मनरेगा यानी “महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना” होता है, परंतु वर्तमान समय में ये *जेसीबी रोजगार गारंटी योजना * बन कर रह गया है और ये सब कुछ संभव हुआ है जनपद के अलग अलग ब्लाकों में बैठे बीडीओ व सचिव की मेहरबानी से,इनके रिश्ते जेसीबी से इतने गहरे हो गए की इन्हे मनरेगा का जिओ भी याद नहीं रहा जिसमे सिर्फ और सिर्फ मानव श्रम को सम्मिलित किया गया है परंतु कमीशन के वशीभूत इन अधिकारियों व कर्मचारियों ने न सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों व जवाबदेही से खिलवाड़ किया बल्कि गरीब मनरेगा श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने के क्रम में रोजगार गारंटी मुहैया कराने के बजाय कमीशन की हवस के आगे अपना जमीर भी गिरवी रख दिया।जितना बड़ा साहब उतना बड़ा कमीशन,फाइलों/ऑनलाइन हाजिरी मानव श्रमिक की परंतु काम जेसीबी का ।